संस्कृत में तद्धित प्रत्यय – परिभाषा, भेद और उदाहरण | Taddhit Pratyay in Sanskrit (Sanskrit Vyakaran)
संज्ञा, सर्वनाम तथा विशेषण आदि शब्दों के साथ जुड़कर अर्थ परिवर्तन करने वाले प्रत्ययों को तद्धित प्रत्यय कहते हैं। जैसे- श्री + मतुप् = श्रीमत् (श्रीमान्)।
- तद्धित प्रत्ययांत शब्दों में कारक विभक्तियाँ लगती हैं।
- तद्धित प्रत्यय का प्रयोग धातुओं के साथ नहीं किया जाता है।
तद्धित प्रत्यय के भेद
1. मतुप् (मत्) प्रत्यय
2. वतुप् (वत्) प्रत्यय
3. इनि (इन्) प्रत्यय
4. तरप् (तर) प्रत्यय
5. तमप् (तम) प्रत्यय
6. मयट् (मय) प्रत्यय
7. अण् (अ) प्रत्यय
8. ठक् (इक) प्रत्यय
9. इतच् (इत) प्रत्यय
10. त्व प्रत्यय
11. तल् (ता) प्रत्यय
12. थाल् (था) प्रत्यय
13. तसिल् प्रत्यय
1. मतुप् (मत्) प्रत्यय
‘वाला‘ या ‘इसके पास है‘ इन अर्थों में प्रथमान्त शब्द से मतुप् (मत्) प्रत्यय का योग किया जाता है। इस प्रत्यय का प्रयोग किसी एक वस्तु का दूसरी वस्तु में होना सूचित करने के लिए होता है।
- ‘मतुप्’ प्रत्यय में ‘उप‘ का लोप होकर केवल ‘मत्’ ही शेष रहता है।
- पुल्लिंग में ‘मान्‘ स्त्रीलिंग में ‘मती‘ और नपुंसकलिंग में ‘मत्‘ जुड़ता है।
- ‘मतुप्’ प्रत्यय के रूप तीनों लिंगों में चलते हैं। ‘मतुप्’ प्रत्यय के रूप पुल्लिंग में ‘भवत्‘ स्त्रीलिंग में ‘नदी‘ और नपुंसकलिंग में ‘जगत्‘ के समान चलते हैं।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ | पुल्लिंग | स्त्रिलिंग | नपुंसकलिंग |
---|---|---|---|---|---|---|
अग्नि | मतुप् | अग्निमत् | अग्नि वाला | अग्निमान् | अग्निमती | अग्निमत् |
आयुष् | मतुप् | आयुष्मत् | लम्बी आयु वाला | आयुष्मान् | आयुष्मती | आयुष्मत् |
अंशु | मतुप् | अंशुमत् | सूर्य | अंशुमान् | अंशुमती | अंशुमत् |
इक्षु | मतुप् | इक्षुमत् | गन्ने वाला | इक्षुमान् | इक्षुमती | इक्षुमत् |
कृति | मतुप् | कृतिमत् | कृति वाला | कृतिमान् | कृतिमती | कृतिमत् |
कीर्ति | मतुप् | कीर्तिमत् | कीर्ति वाला | कीर्तिमान् | कीर्तिमती | कीर्तिमत् |
ककुद् | मतुप् | ककुद्मत् | बैल | ककुद्मान् | ककुद्मती | ककुद्मत् |
गुरुत् | मतुप् | गुरुत्मत् | गरुड़ | गुरुत्मान् | गुरुत्मती | गुरुत्मत् |
गो | मतुप् | गोमत् | गाय वाला | गोमान् | गोमती | गोमत् |
गति | मतुप् | गतिमत् | गति वाला | गतिमान् | गतिमती | गतिमत् |
दृष्टि | मतुप् | दृष्टिमत् | दृष्टि वाला | दृष्टिमान् | दृष्टिमती | दृष्टिमत् |
दीप्ति | मतुप् | दीप्तिमत् | चमक वाला | दीप्तिमान् | दीप्तिमती | दीप्तिमत् |
धनुष् | मतुप् | धनुष्मत् | धनुर्धारी | धनुष्मान् | धनुष्मती | धनुष्मत् |
धी | मतुप् | धीमत् | बुद्धि वाला | धीमान् | धीमती | धीमत् |
प्रीति | मतुप् | प्रीतिमत् | प्रेम वाला | प्रीतिमान् | प्रीतिमती | प्रीतिमत् |
बुद्धि | मतुप् | बुद्धिमत् | बुद्धि वाला | बुद्धिमान् | बुद्धिमती | बुद्धिमत् |
भानु | मतुप् | भानुमत् | चमकने वाला | भानुमान् | भानुमती | भानुमत् |
भक्ति | मतुप् | भक्तिमत् | भक्ति वाला | भक्तिमान् | भक्तिमती | भक्तिमत् |
मधु | मतुप् | मधुमत् | मधु वाला | मधुमान् | मधुमती | मधुमत् |
मति | मतुप् | मतिमत् | बुद्धि वाला | मतिमान् | मतिमती | मतिमत् |
रति | मतुप् | रतिमत् | प्रेम वाला | रतिमान् | रतिमती | रतिमत् |
वह्नि | मतुप् | वह्निमत् | अग्नि वाला | वह्निमान् | वह्निमती | वह्निमत् |
शक्ति | मतुप् | शक्तिमत् | शक्ति वाला | शक्तिमान् | शक्तिमती | शक्तिमत् |
श्री | मतुप् | श्रीमत् | श्री वाला | श्रीमान् | श्रीमती | श्रीमत् |
श्रुति | मतुप् | श्रुतिमत् | सुनने वाला | श्रुतिमान् | श्रुतिमती | श्रुतिमत् |
स्मृति | मतुप् | स्मृतिमत् | स्मृति वाला | स्मृतिमान् | स्मृतिमती | स्मृतिमत् |
सानु | मतुप् | सानुमत् | चोटी वाला | सानुमान् | सानुमती | सानुमत् |
हनु | मतुप् | हनुमत् | विशेष ठोडी वाला | हनुमान् | हनुमती | हनुमत् |
2. वतुप् (वत्) प्रत्यय
‘वाला‘ या ‘इसके पास है‘ इन अर्थों में प्रथमान्त शब्द से वतुप् (वत्) प्रत्यय का योग किया जाता है। इस प्रत्यय का प्रयोग किसी एक वस्तु का दूसरी वस्तु में होना सूचित करने के लिए होता है।
- ‘वतुप्’ प्रत्यय में ‘उप‘ का लोप होकर केवल ‘वत्’ ही शेष रहता है।
- जिन शब्दों के अन्त में या उपधा में ‘अ, आ या म’ हो, तो उनके पश्चात् ‘मतुप् (मत्)’ के स्थान पर वतुप् (वत्) का प्रयोग होता है।
- पुल्लिंग में ‘वान्‘ स्त्रीलिंग में ‘वती‘ और नपुंसकलिंग में ‘वत्‘ जुड़ता है।
- ‘वतुप्’ प्रत्यय के रूप तीनों लिंगों में चलते हैं। ‘वतुप्’ प्रत्यय के रूप पुल्लिंग में ‘भवत्‘ स्त्रीलिंग में ‘नदी‘ और नपुंसकलिंग में ‘जगत्‘ के समान चलते हैं।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ | पुल्लिंग | स्त्रिलिंग | नपुंसकलिंग |
---|---|---|---|---|---|---|
आत्मन् | वतुप् | आत्मवत् | आत्मा वाला | आत्मवान् | आत्मवती | आत्मवत् |
क्रिया | वतुप् | क्रियावत् | क्रिया वाला | क्रियावान् | क्रियावती | क्रियावत् |
कृपा | वतुप् | कृपावत् | कृपा वाला | कृपावान् | कृपावती | कृपावत् |
गुण | वतुप् | गुणवत् | गुण वाला | गुणवान् | गुणवती | गुणवत् |
गंध | वतुप् | गंधवत् | गंध वाला | गंधवान् | गंधवती | गंधवत् |
दया | वतुप् | दयावत् | दया वाला | दयावान् | दयावती | दयावत् |
धन | वतुप् | धनवत् | धन वाला | धनवान् | धनवती | धनवत् |
नभस् | वतुप् | नभस्वत् | नभ वाला | नभस्वान् | नभस्वती | नभस्वत् |
प्रज्ञा | वतुप् | प्रज्ञावत् | बुद्धि वाला | प्रज्ञावान् | प्रज्ञावती | प्रज्ञावत् |
पयस् | वतुप् | पयस्वत् | दूध वाला | पयस्वान् | पयस्वती | पयस्वत् |
फल | वतुप् | फलवत् | फल वाला | फलवान् | फलवती | फलवत् |
बल | वतुप् | बलवत् | बल वाला | बलवान् | बलवती | बलवत् |
भाग्य | वतुप् | भाग्यवत् | भाग्य वाला | भाग्यवान् | भाग्यवती | भाग्यवत् |
मेधा | वतुप् | मेधावत् | बुद्धि वाला | मेधावान् | मेधावती | मेधावत् |
यशस् | वतुप् | यशस्वत् | यश वाला | यशस्वान् | यशस्वती | यशस्वत् |
रूप | वतुप् | रूपवत् | रूप वाला | रूपवान् | रूपवती | रूपवत् |
रस | वतुप् | रसवत् | रस वाला | रसवान् | रसवती | रसवत् |
लक्ष्मी | वतुप् | लक्ष्मीवत् | लक्ष्मी वाला | लक्ष्मीवान् | लक्ष्मीवती | लक्ष्मीवत् |
लज्जा | वतुप् | लज्जावत् | लज्जा वाला | लज्जावान् | लज्जावती | लज्जावत् |
विद्या | वतुप् | विद्यावत् | विद्या वाला | विद्यावान् | विद्यावती | विद्यावत् |
शील | वतुप् | शीलवत् | शील स्वभाव वाला | शीलवान् | शीलवती | शीलवत् |
शिखा | वतुप् | शिखावत् | चोटी वाला | शिखावान् | शिखावती | शिखावत् |
शोभा | वतुप् | शोभावत् | शोभा वाला | शोभावान् | शोभावती | शोभावत् |
सदाचार | वतुप् | सदाचारवत् | सदाचार वाला | सदाचारवान् | सदाचारवती | सदाचारवत् |
स्पर्श | वतुप् | स्पर्शवत् | स्पर्श वाला | स्पर्शवान् | स्पर्शवती | स्पर्शवत् |
सरस् | वतुप् | सरस्वत् | ज्ञान वाला | सरस्वान् | सरस्वती | सरस्वत् |
हिम | वतुप् | हिमवत् | हिम वाला | हिमवान् | हिमवती | हिमवत् |
ज्ञान | वतुप् | ज्ञानवत् | ज्ञान वाला | ज्ञानवान् | ज्ञानवती | ज्ञानवत् |
3. इनि (इन्) प्रत्यय
‘वाला‘ या ‘युक्त‘ अर्थ में अकारान्त शब्दों से इनि (इन्) प्रत्यय का योग किया जाता है।
- ‘इनि’ प्रत्यय में ‘इ‘ का लोप होकर केवल ‘इन्’ ही शेष रहता है।
- ‘इनि’ प्रत्यय के रूप तीनों लिंगों में चलते हैं। पुल्लिंग में ‘दण्डिन्‘ स्त्रीलिंग में ‘नदी‘ और नपुंसकलिंग में ‘दण्डिन्‘ के समान चलते हैं।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ | पुल्लिंग | स्त्रिलिंग | नपुंसकलिंग |
---|---|---|---|---|---|---|
अधिकार | इनि | अधिकारिन् | अधिकार वाला | अधिकारी | अधिकारिणी | अधिकारि |
अर्थ | इनि | अर्थिन् | अर्थ वाला | अर्थी | अर्थिनी | अर्थि |
उल्लास | इनि | उल्लासिन् | उल्लास से युक्त | उल्लासी | उल्लासिनी | उल्लासि |
उद्योग | इनि | उद्योगिन् | परिश्रम से युक्त | उद्योगी | उद्योगिनी | उद्योगि |
कुमुद | इनि | कुमुदिन् | कुमुद वाला | कुमुदी | कुमुदिनी | कुमुदि |
कर | इनि | करिन् | हाथी | करी | करिणी | करि |
क्रोध | इनि | क्रोधिन् | क्रोध से युक्त | क्रोधी | क्रोधिनी | क्रोधि |
गुण | इनि | गुणिन् | गुण से युक्त | गुणी | गुणिनी | गुणि |
गृह | इनि | गृहिन् | गृह वाला | गृही | गृहिणी | गृहि |
दण्ड | इनि | दण्डिन् | दण्ड वाला | दण्डी | दण्डिनी | दण्डि |
दुःख | इनि | दुःखिन् | दुःख से युक्त | दुःखी | दुःखिनी | दुःखि |
देह | इनि | देहिन् | देह वाला | देही | देहिनी | देहि |
धन | इनि | धनिन् | धन वाला | दण्डी | धनिनी | धनि |
धर्म | इनि | धर्मिन् | धर्म वाला | धर्मी | धर्मिणी | धर्मि |
माया | इनि | मायिन् | माया से युक्त | मायी | मायिनी | मायि |
पताका | इनि | पताकिन् | पताका से युक्त | पताकी | पताकिनी | पताकि |
पिनाक | इनि | पिनाकिन् | पिनाक वाला | पिनाकी | पिनाकिनी | पिनाकि |
योग | इनि | योगिन् | योग वाला | योगी | योगिनी | योगि |
फल | इनि | फलिन् | फल से युक्त | फली | फलिनी | फलि |
बल | इनि | बलिन् | बल से युक्त | बली | बलिनी | बलि |
माला | इनि | मालिन् | माला से युक्त | माली | मालिनी | मालि |
मान | इनि | मानिन् | मान से युक्त | मानी | मानिनी | मानि |
रथ | इनि | रथिन् | रथ वाला | रथी | रथिनी | रथि |
रूप | इनि | रूपिन् | रूप से युक्त | रूपी | रूपिणी | रूपि |
लोभ | इनि | लोभिन् | लोभ से युक्त | लोभी | लोभिनी | लोभि |
वीणा | इनि | विणिन् | वीणा से युक्त | विणी | विणिनी | विणि |
वास | इनि | वासिन् | वास वाला | वासी | वासिनी | वासि |
विवेक | इनि | विवेकिन् | विवेक से युक्त | विवेकी | विवेकिनी | विवेकि |
वाद | इनि | वादिन् | वाद वाला | वादी | वादिनी | वादि |
विकार | इनि | विकारिन् | विकार से युक्त | विकारी | विकारिनी | विकारि |
शाला | इनि | शालिन् | शाला से युक्त | शाली | शालिनी | शालि |
सुख | इनि | सुखिन् | सुख से युक्त | सुखी | सुखिनी | सुखि |
साहस | इनि | साहसिन् | साहस से युक्त | साहसी | साहसिनी | साहसि |
संसार | इनि | संसारिन् | संसार वाला | संसारी | संसारिनी | संसारि |
हस्त | इनि | हस्तिन् | हस्त वाला | हस्ती | हस्तिनी | हस्ति |
ज्ञान | इनि | ज्ञानिन् | ज्ञान से युक्त | ज्ञानी | ज्ञानिनी | ज्ञानि |
4. तरप् (तर) प्रत्यय
दो वस्तुओं में से किसी एक को श्रेष्ठ (अच्छा) या निकृष्ट (खराब) बताने के लिए शब्द में ‘तरप्’ प्रत्यय जोड़ा जाता है।
- ‘तरप्’ प्रत्यय में ‘प्‘ का लोप होकर केवल ‘तर’ शेष रहता है।
- ‘तरप्’ प्रत्यय के रूप तीनों लिंगों में चलते हैं। पुल्लिंग में ‘राम’ के समान, स्त्रीलिंग में ‘रमा’ के समान तथा नपुंसकलिंग में ‘फल’ के समान चलते हैं।
- ‘तरप्’ प्रत्यय विशेषण शब्दों में लगता है।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ | पुल्लिंग | स्त्रिलिंग | नपुंसकलिंग |
---|---|---|---|---|---|---|
अल्प | तरप् | अल्पतरः | थोड़ा | अल्पतरः | अल्पतरा | अल्पतरम् |
उच्च | तरप् | उच्चतरः | ऊँचा | उच्चतरः | उच्चतरा | उच्चतरम् |
कुशल | तरप् | कुशलतरः | कुशल | कुशलतरः | कुशलतरा | कुशलतरम् |
गुरु | तरप् | गुरुतरः | भारी | गुरुतरः | गुरुतरा | गुरुतरम् |
चतुर | तरप् | चतुरतरः | चतुर | चतुरतरः | चतुरतरा | चतुरतरम् |
तीव्र | तरप् | तीव्रतरः | तेज | तीव्रतरः | तीव्रतरा | तीव्रतरम् |
निम्न | तरप् | निम्नतरः | नीचा | निम्नतरः | निम्नतरा | निम्नतरम् |
प्रशस्य | तरप् | प्रशस्यतरः | प्रशंसनीय | प्रशस्यतरः | प्रशस्यतरा | प्रशस्यतरम् |
पटु | तरप् | पटुतरः | चतुर | पटुतरः | पटुतरा | पटुतरम् |
प्रिय | तरप् | प्रियतरः | प्यारा | प्रियतरः | प्रियतरा | प्रियतरम् |
बहु | तरप् | बहुतरः | बहुत | बहुतरः | बहुतरा | बहुतरम् |
बहुल | तरप् | बहुलतरः | अधिक | बहुलतरः | बहुलतरा | बहुलतरम् |
मृदु | तरप् | मृदुतरः | कोमल | मृदुतरः | मृदुतरा | मृदुतरम् |
लघु | तरप् | लघुतरः | छोटा | लघुतरः | लघुतरा | लघुतरम् |
श्रेष्ठ | तरप् | श्रेष्ठतरः | श्रेष्ठ | श्रेष्ठतरः | श्रेष्ठतरा | श्रेष्ठतरम् |
सुन्दर | तरप् | सुन्दरतरः | सुन्दर | सुन्दरतरः | सुन्दरतरा | सुन्दरतरम् |
साधु | तरप् | साधुतरः | भला | साधुतरः | साधुतरा | साधुतरम् |
स्थिर | तरप् | स्थिरतरः | स्थिर | स्थिरतरः | स्थिरतरा | स्थिरतरम् |
ह्रस्व | तरप् | ह्रस्वतरः | छोटा | ह्रस्वतरः | ह्रस्वतरा | ह्रस्वतरम् |
क्षुद्र | तरप् | क्षुद्रतरः | अधम | क्षुद्रतरः | क्षुद्रतरा | क्षुद्रतरम् |
5. तमप् (तम) प्रत्यय
दो से अधिक (बहुतों) में से किसी एक को श्रेष्ठ (अच्छा) या निकृष्ट (खराब) बताने के लिए शब्द के साथ ‘तमप्’ प्रत्यय जोड़ा जाता है।
- ‘तमप्’ प्रत्यय में ‘प्‘ का लोप होकर केवल ‘तम’ शेष रहता है
- ‘तमप्’ प्रत्यय के रूप तीनों लिंगों में चलते हैं। पुल्लिंग में ‘राम’ के समान, स्त्रीलिंग में ‘रमा’ के समान तथा नपुंसकलिंग में ‘फल’ के समान चलते हैं।
- ‘तमप्’ प्रत्यय गुणवाचक शब्दों में लगता है।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ | पुल्लिंग | स्त्रिलिंग | नपुंसकलिंग |
---|---|---|---|---|---|---|
अल्प | तमप् | अल्पतमः | थोड़ा | अल्पतमः | अल्पतमा | अल्पतमम् |
उच्च | तमप् | उच्चतमः | ऊँचा | उच्चतमः | उच्चतमा | उच्चतमम् |
कुशल | तमप् | कुशलतमः | कुशल | कुशलतमः | कुशलतमा | कुशलतमम् |
गुरु | तमप् | गुरुतमः | भारी | गुरुतमः | गुरुतमा | गुरुतमम् |
चतुर | तमप् | चतुरतमः | चतुर | चतुरतमः | चतुरतमा | चतुरतमम् |
तीव्र | तमप् | तीव्रतमः | तेज | तीव्रतमः | तीव्रतमा | तीव्रतमम् |
निम्न | तमप् | निम्नतमः | नीचा | निम्नतमः | निम्नतमा | निम्नतमम् |
पटु | तमप् | पटुतमः | चतुर | पटुतमः | पटुतमा | पटुतमम् |
प्रशस्य | तमप् | प्रशस्यतमः | प्रशंसनीय | प्रशस्यतमः | प्रशस्यतमा | प्रशस्यतमम् |
प्रिय | तमप् | प्रियतमः | थोड़ा | प्रियतमः | प्रियतमा | प्रियतमम् |
बहु | तमप् | बहुतमः | बहुत | बहुतमः | बहुतमा | बहुतमम् |
मृदु | तमप् | मृदुतमः | कोमल | मृदुतमः | मृदुतमा | मृदुतमम् |
लघु | तमप् | लघुतमः | छोटा | लघुतमः | लघुतमा | लघुतमम् |
श्रेष्ठ | तमप् | श्रेष्ठतमः | श्रेष्ठ | श्रेष्ठतमः | श्रेष्ठतमा | श्रेष्ठतमम् |
स्थिर | तमप् | स्थिरतमः | स्थिर | स्थिरतमः | स्थिरतमा | स्थिरतमम् |
साधु | तमप् | साधुतमः | भला | साधुतमः | साधुतमा | साधुतमम् |
सुन्दर | तमप् | सुन्दरतमः | सुन्दर | सुन्दरतमः | सुन्दरतमा | सुन्दरतमम् |
ह्रस्व | तमप् | ह्रस्वतमः | छोटा | ह्रस्वतमः | ह्रस्वतमा | ह्रस्वतमम् |
क्षुद्र | तमप् | क्षुद्रतमः | अधम | क्षुद्रतमः | क्षुद्रतमा | क्षुद्रतमम् |
6. मयट् (मय) प्रत्यय
प्रचुरता के अर्थ में ‘मयट्’ प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है। वस्तुवाचक शब्दों से (खाद्य वस्तुओं को छोड़कर) विकार अर्थ में भी ‘मयट्’ प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
- ‘मयट्’ प्रत्यय में ‘ट्‘ का लोप होकर केवल ‘मय’ शेष रहता है
- ‘मयट्’ प्रत्यय का प्रयोग संज्ञावाचक शब्दों को विशेषण बनाने के लिए किया जाता है।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ | पुल्लिंग | स्त्रिलिंग | नपुंसकलिंग |
---|---|---|---|---|---|---|
आम्र | मयट् | आम्रमयः | आम से युक्त | आम्रमयः | आम्रमयी | आम्रमयम् |
आनन्द | मयट् | आनन्दमयः | आनन्द से युक्त | आनन्दमयः | आनन्दमयी | आनन्दमयम् |
अन्धकार | मयट् | अन्धकारमयः | अन्धकार से युक्त | अन्धकारमयः | अन्धकारमयी | अन्धकारमयम् |
करुणा | मयट् | करुणामयः | दया से युक्त | करुणामयः | करुणामयी | करुणामयम् |
जल | मयट् | जलमयः | जल से युक्त | जलमयः | जलमयी | जलमयम् |
तेजः | मयट् | तेजोमयः | तेज से युक्त | तेजोमयः | तेजोमयी | तेजोमयम् |
तिल | मयट् | तिलमयः | तिल से युक्त | तिलमयः | तिलमयी | तिलमयम् |
तृण | मयट् | तृणमयः | तिनके से युक्त | तृणमयः | तृणमयी | तृणमयम् |
दुःख | मयट् | दुःखमयः | दुःख से युक्त | दुःखमयः | दुःखमयी | दुःखमयम् |
पवित्र | मयट् | पवित्रमयः | पवित्रता से युक्त | पवित्रमयः | पवित्रमयी | पवित्रमयम् |
प्रकाश | मयट् | प्रकाशमयः | प्रकाश से युक्त | प्रकाशमयः | प्रकाशमयी | प्रकाशमयम् |
मृत् | मयट् | मृण्मयः | मिट्टी से युक्त | मृण्मयः | मृण्मयी | मृण्मयम् |
ममता | मयट् | ममतामयः | ममता से युक्त | ममतामयः | ममतामयी | ममतामयम् |
लौह | मयट् | लौहमयः | लोहे से युक्त | लौहमयः | लौहमयी | लौहमयम् |
वाच् | मयट् | वाङ्गमयः | वाणी से युक्त | वाङ्गमयः | वाङ्गमयी | वाङ्गमयम् |
शान्ति | मयट् | शान्तिमयः | शान्ति से युक्त | शान्तिमयः | शान्तिमयी | शान्तिमयम् |
शोक | मयट् | शोकमयः | शोक से युक्त | शोकमयः | शोकमयी | शोकमयम् |
स्वर्ण | मयट् | स्वर्णमयः | सोने से युक्त | स्वर्णमयः | स्वर्णमयी | स्वर्णमयम् |
सुख | मयट् | सुखमयः | सुख से युक्त | सुखमयः | सुखमयी | सुखमयम् |
सुन्दर | मयट् | सुन्दरमयः | सुन्दरता से युक्त | सुन्दरमयः | सुन्दरमयी | सुन्दरमयम् |
संस्कार | मयट् | संस्कारमयः | संस्कार से युक्त | संस्कारमयः | संस्कारमयी | संस्कारमयम् |
7. अण् (अ) प्रत्यय
अपत्य (संतान, जैसे पुत्र या पुत्री) तथा किसी वस्तु के समूह अर्थ में शब्द से ‘अण्’ प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
- ‘अण्’ प्रत्यय में ‘ण्‘ का लोप होकर केवल ‘अ’ शेष रहता है।
- अण् प्रत्यय लगाने पर आदि स्वर की वृद्धि होती है। जैसे – अ के स्थान पर आ, इ / ई / ए के स्थान पर ऐ और उ / ऊ / ओ के स्थान पर औ हो जाता है।
- अण् प्रत्यय लगाने पर शब्द के अंतिम स्वर का लोप हो जाता है।
- भाव अर्थ में भी अण् प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
- ‘अण्’ प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण तथा अव्यय शब्दों के अंत में प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ |
---|---|---|---|
अश्वपति | अण् | आश्वपतः | अश्वपति की संतान |
इंद्र | अण् | ऐंद्रः | इंद्र के भक्त |
कुरु | अण् | कौरवः | कुरु की संतान |
कश्यप | अण् | काश्यपः | कश्यप की संतान |
कपोत | अण् | कापोतम् | कबूतरों का समूह |
काक | अण् | काकम् | कौओं का समूह |
कुशल | अण् | कौशलम् | कुशलता |
गुरु | अण् | गौरवम् | गर्व की भावना |
जिन | अण् | जैनः | जिन (महावीर) के भक्त |
दनु | अण् | दानवः | दनु की संतान |
पण्डु | अण् | पाण्डवः | पाण्डु की संतान |
पुत्र | अण् | पौत्रः | पुत्र की संतान |
बुद्ध | अण् | बौद्धः | बुद्ध के भक्त |
बक | अण् | बाकम् | बगुलों का समूह |
भिक्षा | अण् | भैक्षम् | भिक्षुओं का समूह |
मनु | अण् | मानवः | मनु की संतान |
मधु | अण् | माधवः | मधु की संतान |
मनुष्य | अण् | मानुष्यम् | मनुष्यों का समूह |
मयूर | अण् | मायूरम् | मयूरों का समूह |
मृदु | अण् | मार्दवम् | कोमलता |
यदु | अण् | यादवः | यदु की संतान |
रूद्र | अण् | रौद्रः | रूद्र के भक्त |
लघु | अण् | लाघवम् | लघु अवस्था |
व्याकरण | अण् | वैयाकरणः | व्याकरण को जानने वाला |
वसुदेव | अण् | वासुदेवः | वसुदेव की संतान |
वशिष्ठ | अण् | वाशिष्ठः | वशिष्ठ की संतान |
विश्वामित्र | अण् | वैश्वामित्रः | विश्वामित्र की संतान |
विष्णु | अण् | वैष्णवः | विष्णु के भक्त |
शक्ति | अण् | शाक्तः | शक्ति के भक्त |
शिव | अण् | शैवः | शिव के भक्त |
शिशु | अण् | शैशवम् | शिशु की अवस्था |
शिक्षक | अण् | शैक्षकम् | शिक्षकों का समूह |
सरस्वती | अण् | सारस्वतः | सरस्वती की संतान |
8. ठक् (इक) प्रत्यय
शब्दों से भाव अर्थ में ‘ठक्’ प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
- ‘ठक्’ प्रत्यय में ‘ठक्‘ का ‘इक्’ हो जाता है।
- ठक् प्रत्यय लगाने पर आदि स्वर की वृद्धि हो जाती है। जैसे – अ के स्थान पर आ, इ / ई / ए के स्थान पर ऐ और उ / ऊ / ओ के स्थान पर औ हो जाता है।
- ठक् प्रत्ययांत शब्द विशेषण होते हैं।
- ठन् तथा ठञ् प्रत्यय में भी ‘इक्’ हो जाता है।
- ‘ठक् ’ प्रत्यय के रूप तीनों लिंगों में चलते हैं। पुल्लिंग में ‘राम’ के समान, स्त्रीलिंग में ‘नदी’ के समान तथा नपुंसकलिंग में ‘फल’ के समान चलते हैं।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ | पुल्लिंग | स्त्रिलिंग | नपुंसकलिंग |
---|---|---|---|---|---|---|
अध्यात्म | ठक् | आध्यात्मिक | भौतिकता से परे जीवन का अनुभव करना | आध्यात्मिकः | आध्यात्मिकी | आध्यात्मिकम् |
अस्ति | ठक् | आस्तिक | ‘है’ ऐसा मानने वाला | आस्तिकः | आस्तिकी | आस्तिकम् |
इतिहास | ठक् | ऐतिहासिक | इतिहास पढ़ने वाला | ऐतिहासिकः | ऐतिहासिकी | ऐतिहासिकम् |
कर्म | ठक् | कार्मिक | कर्म करने वाला | कार्मिकः | कार्मिकी | कार्मिकम् |
कृत | ठक् | कार्तिक | एक महीना | कार्तिकः | कार्तिकी | कार्तिकम् |
दधि | ठक् | दाधिक | दही से | दाधिकः | दाधिकी | दाधिकम् |
देह | ठक् | दैहिक | शारीरिक | दैहिकः | दैहिकी | दैहिकम् |
दिन | ठक् | दैनिक | नित्य होने वाला | दैनिकः | दैनिकी | दैनिकम् |
धर्म | ठक् | धार्मिक | धर्म करने वाला | धार्मिकः | धार्मिकी | धार्मिकम् |
नगर | ठक् | नागरिक | नगरवासी | नागरिकः | नागरिकी | नागरिकम् |
नास्ति | ठक् | नास्तिक | ‘नहीं है’ ऐसा मानने वाला | नास्तिकः | नास्तिकी | नास्तिकम् |
न्याय | ठक् | नैयायिक | न्याय जानने वाला | नैयायिकः | नैयायिकी | नैयायिकम् |
पुराण | ठक् | पौराणिक | पुराण पढ़ने वाला | पौराणिकः | पौराणिकी | पौराणिकम् |
पक्ष | ठक् | पाक्षिक | 15 दिन में एक बार होने वाला | पाक्षिकः | पाक्षिकी | पाक्षिकम् |
भूत | ठक् | भौतिक | पाँचों भूत से बना हुआ | भौतिकः | भौतिकी | भौतिकम् |
भूगोल | ठक् | भौगोलिक | भूगोल संबंधी | भौगोकः | भौगोकी | भौगोकम् |
मीन | ठक् | मैनिक | मछलियों को मारने वाला | मैनिकः | मैनिकी | मैनिकम् |
मरीच | ठक् | मारिचक | मिर्ची से | मारिचकः | मारिचकी | मारिचकम् |
मयूर | ठक् | मायूरिक | मोरों को मारने वाला | मायूरिकः | मायूरिकी | मायूरिकम् |
मूल | ठक् | मौलिक | जो किसी की नकल हो | मौलिकः | मौलिकी | मौलिकम् |
लक्ष | ठक् | लाक्षिक | लाख का बना हुआ | लाक्षिकः | लाक्षिकी | लाक्षिकम् |
वेद | ठक् | वैदिक | वेद पढ़ने वाला | वैदिकः | वैदिकी | वैदिकम् |
वर्ष | ठक् | वार्षिक | वर्ष में एक बार होने वाला | वार्षिकः | वार्षिकी | वार्षिकम् |
वाच् | ठक् | वाचिक | मुँह से कहा हुआ | वाचिकः | वाचिकी | वाचिकम् |
वृत्ति | ठक् | वार्तिक | वृत्ति पढ़ने वाला | वार्तिकः | वार्तिकी | वार्तिकम् |
शरीर | ठक् | शारीरिक | शरीर संबंधी | शारीरिकः | शारीरिकी | शारीरिकम् |
शब्द | ठक् | शाब्दिक | शब्द करने वाला | शाब्दिकः | शाब्दिकी | शाब्दिकम् |
समाज | ठक् | सामाजिक | समाज की रक्षा करने वाला | सामाजिकः | सामाजिकी | सामाजिकम् |
संसार | ठक् | सांसारिक | जिसका संबंध संसार की वस्तुओं से हो | सांसारिकः | सांसारिकी | सांसारिकम् |
सप्ताह | ठक् | साप्ताहिक | सप्ताह में एक बार होने वाला | साप्ताहिकः | साप्ताहिकी | साप्ताहिकम् |
हल | ठक् | हालिक | हल करने वाला | हालिकः | हालिकी | हालिकम् |
हस्ती | ठक् | हास्तिक | हाथी से जाने वाला | हास्तिकः | हास्तिकी | हास्तिकम् |
हरिण | ठक् | हारिणिक | हिरणों को मारने वाला | हारिणिकः | हारिणिकी | हारिणिकम् |
9. इतच् (इत) प्रत्यय
सहित या युक्त अर्थ में ‘इतच्’ प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
- ‘इतच्’ प्रत्यय में ‘च्‘ का लोप हो जाता है और ‘इत’ शेष रहता है।
- ‘इतच्’ प्रत्यय के रूप तीनों लिंगों में चलते हैं। पुल्लिंग में ‘राम’ के समान, स्त्रीलिंग में ‘रमा’ के समान तथा नपुंसकलिंग में ‘फल’ के समान चलते हैं।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ | पुल्लिंग | स्त्रिलिंग | नपुंसकलिंग |
---|---|---|---|---|---|---|
अंकुर | इतच् | अंकुरित | अंकुर से युक्त | अंकुरितः | अंकुरिता | अंकुरितम् |
उत्कण्ठा | इतच् | उत्कण्ठित | उत्कण्ठा से युक्त | उत्कण्ठितः | उत्कण्ठिता | उत्कण्ठितम् |
कण्टक | इतच् | कण्टकित | काँटों से युक्त | कण्टकितः | कण्टकिता | कण्टकितम् |
कुसुम | इतच् | कुसुमित | फूलों से युक्त | कुसुमितः | कुसुमिता | कुसुमितम् |
गर्व | इतच् | गर्वित | घमंड से युक्त | गर्वितः | गर्विता | गर्वितम् |
तारक | इतच् | तारकित | तारक से युक्त | तारकितः | तारकिता | तारकितम् |
तरंग | इतच् | तरंगित | तरंग से युक्त | तरंगितः | तरंगिता | तरंगितम् |
दुःख | इतच् | दुःखित | दुःख से युक्त | दुःखितः | दुःखिता | दुःखितम् |
दीक्षा | इतच् | दीक्षित | दीक्षा से युक्त | दीक्षितः | दीक्षिता | दीक्षितम् |
पिपासा | इतच् | पिपासित | प्यास से युक्त | पिपासितः | पिपासिता | पिपासितम् |
बुभुक्षा | इतच् | बुभुक्षित | भूख से युक्त | बुभुक्षितः | बुभुक्षिता | बुभुक्षितम् |
मुद्रा | इतच् | मुद्रित | मुद्रा से युक्त | मुद्रितः | मुद्रिता | मुद्रितम् |
मूर्छा | इतच् | मूर्छित | मूर्छा से युक्त | मूर्छितः | मूर्छिता | मूर्छितम् |
व्याधि | इतच् | व्याधित | व्याधि से युक्त | व्याधितः | व्याधिता | व्याधितम् |
सुख | इतच् | सुखित | सुख से युक्त | सुखितः | सुखिता | सुखितम् |
हर्ष | इतच् | हर्षित | ख़ुशी से युक्त | हर्षितः | हर्षिता | हर्षितम् |
क्षुधा | इतच् | क्षुधित | भूख से युक्त | क्षुधितः | क्षुधिता | क्षुधितम् |
10. त्व प्रत्यय
भाववाचक संज्ञा बनाने के लिए शब्दों से ‘त्व’ प्रत्यय का योग किया जाता है।
- ‘त्व’ प्रत्यय से युक्त शब्द नपुंसकलिङ्ग होते हैं और इनके रूप ‘फल’ के समान चलते हैं।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ |
---|---|---|---|
कुशल | त्व | कुशलत्वम् | निपुणता |
कटु | त्व | कटुत्वम् | कटुता |
गुरु | त्व | गुरुत्वम् | भारीपन |
गहन | त्व | गहनत्वम् | गहराई |
चपल | त्व | चपलत्वम् | चंचलता |
जड़ | त्व | जड़त्वम् | जड़ता |
देव | त्व | देवत्वम् | देवत्वता |
प्रचण्ड | त्व | प्रचण्डत्वम् | उग्रता |
पशु | त्व | पशुत्वम् | जानवरपन |
पवित्र | त्व | पवित्रत्वम् | निर्मलता |
मधुर | त्व | मधुरत्वम् | मिठास |
पटु | त्व | पटुत्वम् | चतुराई |
ब्राह्मण | त्व | ब्राह्मणत्वम् | ब्राह्मणता |
मित्र | त्व | मित्रत्वम् | दोस्ती |
महत् | त्व | महत्त्वम् | महानता |
मूर्ख | त्व | मूर्खत्वम् | बेवकूफ़ी |
मृदु | त्व | मृदुत्वम् | कोमलता |
लघु | त्व | लघुत्वम् | छोटापन |
विद्वस् | त्व | विद्वत्वम् | पंडिताई |
शुक्ल | त्व | शुक्लत्वम् | सफ़ेदी |
शिशु | त्व | शिशुत्वम् | बचपन |
सम | त्व | समत्वम् | समानता |
11. तल् (ता) प्रत्यय
भाववाचक संज्ञा बनाने के लिए शब्दों से ‘तल्’ प्रत्यय का योग किया जाता है।
- ‘तल्’ प्रत्ययान्त शब्द के अन्त मे ‘टाप्‘ प्रत्यय लगता है। तल् प्रत्यय का ‘ता‘ शेष रहता है।
- ‘तल्’ प्रत्यय से युक्त शब्द स्त्रीलिङ्ग होते हैं और इनके रूप ‘रमा’ के समान चलते हैं।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ |
---|---|---|---|
कुशल | तल् | कुशलता | निपुणता |
कटु | तल् | कटुता | कड़वापन |
गुरु | तल् | गुरुता | भारीपन |
गहन | तल् | गहनता | गहराई |
चपल | तल् | चपलता | चंचलता |
पटु | तल् | पटुता | चतुराई |
प्रचण्ड | तल् | प्रचण्डता | उग्रता |
पशु | तल् | पशुता | जानवरपन |
पवित्र | तल् | पवित्रता | निर्मलता |
ब्राह्मण | तल् | ब्राह्मणता | ब्राह्मणता |
मित्र | तल् | मित्रता | दोस्ती |
महत् | तल् | महत्ता | महानता |
मधुर | तल् | मधुरता | मिठास |
मूर्ख | तल् | मूर्खता | बेवकूफ़ी |
मृदु | तल् | मृदुता | कोमलता |
गुरु | तल् | गुरुता | भारीपन |
लघु | तल् | लघुता | छोटापन |
विद्वस् | तल् | विद्वत्ता | पंडिताई |
शुक्ल | तल् | शुक्लता | सफ़ेदी |
शिशु | तल् | शिशुता | बचपन |
सम | तल् | समता | समानता |
12. थाल् (था) प्रत्यय
किम् आदि सर्वनामों से ‘प्रकार’ अर्थ में ‘थाल्’ प्रत्यय का योग किया जाता है।
- ‘थाल्’ प्रत्यय में ‘ल्‘ का लोप होकर केवल ‘था’ शेष रहता है।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ |
---|---|---|---|
उभय | थाल् | उभयथा | दो प्रकार |
तद् | थाल् | तथा | वैसे या उस प्रकार |
यद् | थाल् | यथा | जैसे या जिस प्रकार |
सर्व | थाल् | सर्वथा | सब प्रकार |
13. तसिल् प्रत्यय
पञ्चमी विभक्ति के अर्थ में ‘तसिल्’ प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
- ‘तसिल्’ प्रत्यय में ‘इल्‘ का लोप होकर केवल ‘तस्’ शेष रहता है और ‘तस्‘ का ‘तः‘ हो जाता है।
- तसिल् प्रत्यय से बने शब्द अव्यय होते हैं।
- तसिल् प्रत्यय केवल पंचमी विभक्ति वाले शब्दों के साथ ही प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण
शब्द | प्रत्यय | प्रत्यय युक्त शब्द | अर्थ |
---|---|---|---|
एतस्मात् | तसिल् | इतः | इधर से |
ग्रामात् | तसिल् | ग्रामतः | गाँव से |
तस्मात् | तसिल् | ततः | वहाँ से |
त्वत् | तसिल् | त्वत्तः | तुमसे |
दिल्ल्याः | तसिल् | दिल्लीतः | दिल्ली से |
वाराणस्याः | तसिल् | वाराणसीतः | वाराणसी से |
वृक्षात् | तसिल् | वृक्षतः | वृक्ष से |
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