Dhatu Roop

धातु रूप (तिड्न्त प्रकरण) की परिभाषा, भेद और उदाहरण | Dhatu Roop In Sanskrit

संस्कृत व्याकरण में क्रियाओं के मूल रूप को धातु (Verb) कहते हैं। धातु ही संस्कृत शब्दों के निर्माण का मूल तत्त्व है। धातुओं के साथ उपसर्ग, प्रत्यय मिलकर तथा सामासिक क्रियाओं के द्वारा सभी शब्द (संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया आदि) बनते हैं। ‘धातु’ शब्द स्वयं ‘धा’ में ‘तिन्’ प्रत्यय जोड़ने से बना है। भू, स्था, ज्ञा, युज्, गम्, मन्, दृश् आदि कुछ प्रमुख धातुएँ हैं।

धातु – जिन शब्दों के द्वारा किसी काम का करना या होना पाया जाता है, उसे क्रिया या धातु कहते है। धातु शब्द का अर्थ है- धारण करना, रखना आदि। पठति, गच्छति, क्रीडति आदि क्रियाओं की क्रमश: पठ्, गम्, क्रीड् धातुएँ हैं।

लकार – व्याकरण में वाक्य में प्रयोग होने वाले क्रिया के काल या वृत्ति को ‘लकार’ कहते हैं। संस्कृत भाषा में दस (10) लकार होते हैं। लकारों से हमें विभिन्न कालों एवं स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है। लकारों के सम्बंध में निम्न श्लोक प्रसिद्ध है –

लट् वर्तमाने लेट् वेदे भूत लुङ् , लङ् , लिट् तथा।
विध्याशिषोsस्तु लिङ् लोटौ लुट् लृट- लृङ् च भविष्यत:।।

इस श्लोक में 10 लकारों का वर्णन है, लट्, लिट्, लुट्, लृट्, लेट्, लोट्, लङ्, लिङ्, लुङ्, लृङ्।

1 . लट् लकार (वर्तमान काल, Present Tense) – लट् लकार का प्रयोग वर्तमान काल के अर्थ को प्रदर्शित करने के लिए होता है।

2. लङ् लकार (भूतकाल, Past Tense) – यदि कोई कार्य भूतकाल ( बीते हुए समय ) में हो तो वहाँ लङ् लकार का प्रयोग होता है।

3. लृट् लकार (भविष्यत काल, Future Tense) – लृट् लकार का प्रयोग भविष्यत् काल का बोध कराता है।

4. लोट् लकार (आज्ञा के अर्थ में, Imperative Tense) – यदि किसी वाक्य में आज्ञा या आदेश सम्बंधी कथन हो तो वहाँ लोट् लकार का प्रयोग होता है।

5. विधिलिङ् लकार (चाहिए के अर्थ में, Potential Mood) – जब किसी को कोई परामर्श या सलाह देनी हो तो वहाँ विधिलिङ् लकार का प्रयोग किया जाता है।

6. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल, Perfect Tense) – सामान्य भूतकाल को बताने के लिए इस लकार का प्रयोग होता है। वह काल जो कभी भी बीत चुका हो।

7. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल, Past Perfect Tense) – ऐसा भूतकाल जो अपने साथ घटित न होकर किसी इतिहास का विषय हो, वहाँ लिट् लकार का प्रयोग किया जाता है।

8. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्य काल, First Future Tense of Periphrastic) – जो आज का दिन छोड़ कर आगे होने वाला हो, वहाँ लुट् लकार का प्रयोग होता है |

9. आशिर्लिङ् लकार (आशीर्वाद हेतु, Benedictive Mood) – जहाँ किसी को आशीर्वाद देना हो, वहाँ आशिर्लिङ् लकार का प्रयोग होता है |

10. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भविष्य काल, Conditional Mood) – ऐसा होगा तो ऐसा होगा, इस प्रकार के अर्थ देने वाले वाक्यों में लृङ् लकार का प्रयोग होता है |

पुरूष – संस्कृत भाषा में तीन पुरूष होते हैं – प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष, उत्तम पुरूष।

1. प्रथम पुरूष – प्रथम पुरुष को अन्य पुरुष भी कहा जाता है। अस्मद् और युष्मद् शब्द के कर्ताओं को छोड़कर शेष जितने भी कर्ता हैं, वे सभी प्रथम पुरूष के अंतर्गत आते है।

2. मध्यम पुरुष – इसमें केवल युष्मद् शब्द के कर्ता का प्रयोग होता है।

3. उत्तम पुरूष – इसमें भी केवल अस्मद् शब्द के कर्ता का प्रयोग होता है।

वचन – संस्कृत भाषा में तीन वचन होते हैं।

1. एकवचन (Singular Number) – जिससे एक का बोध होता है। उसे एकवचन कहते हैं। जैसे- बालक: पठति।

2. द्विवचन (Dual Number) – जिनसे दो का बोध होता है। उसे द्विवचन कहते है। जैसे- बालकौ पठत:।

3. बहुवचन (Plural Number) – जिससे दो से अधिक का बोध होता है, उसे बहुवचन कहते है। जैसे- बालका: पठन्ति।

धातुओं के भेद – संस्कृत भाषा में धातुओं को तीन भागों में बाटा गया है।

1. परस्मैपद – ऐसा वाक्य जो कर्तृवाच्य हो, वहाँ परस्मैपद धातु का प्रयोग होता है। जिन क्रियाओं का फल कर्ता को छोड़कर अन्य (कर्म) को मिलता है, उन्हे परस्मैपद धातु कहा जाता है।

2. आत्मनेपद – जिन क्रियाओं का फल सीधा कर्ता को मिलता, उसे आत्मनेपद कहते हैं। कर्मवाच्य एवं भाववाच्य में सभी धातुएँ आत्मनेपदी होते हैं।

3. उभयपद – जिन क्रियाओं के रूप परस्मैपद और आत्मनेपद दोनों प्रकार से चलते हैं, उन्हे उभयपद कहा जाता है।

परस्मैपद लकारों की धातु रुप सरंचना

धातु रूप लिखने की trick नीचे table में दी गई है, जिससे आप सभी प्रकार के धातु रूप आसानी से बना सकते हैं।
1 . लट् लकार (वर्तमान काल, Present Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषतितस् (तः)अन्ति
मध्यम पुरुषसिथस् (थः)
उत्तम पुरुषमिवस् (वः)मस् (मः)

2. लृट् लकार (भविष्यत काल, Future Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषष्यतिष्यतम् (ष्यतः)ष्यन्ति
मध्यम पुरुषष्यसिष्यथस् (ष्यथः)ष्यथ
उत्तम पुरुषष्यामिष्यावःष्यामः

3. लङ् लकार (भूतकाल, Past Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषत्ताम्अन्
मध्यम पुरुषस्तम्
उत्तम पुरुषअम्

4. लोट् लकार (आज्ञा के अर्थ में, Imperative Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषतुताम्अन्तु
मध्यम पुरुषहितम्
उत्तम पुरुषआनिआवआम

5. विधिलिङ् लकार (चाहिए के अर्थ में, Potential Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषयात्याताम्युस्
मध्यम पुरुषयास्यातम्यात्
उत्तम पुरुषयाम्यावयाम

6. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल, Perfect Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषद्ताम्अन्
मध्यम पुरुषस्तम्
उत्तम पुरुषअम्

7. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल, Past Perfect Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअतुस्उस्
मध्यम पुरुषअथुस्
उत्तम पुरुष

8. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्य काल, First Future Tense of Periphrastic)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषतातारौतारस्
मध्यम पुरुषतासितास्थस्तास्थ
उत्तम पुरुषतास्मितास्वस्तास्मस्

9. आशिर्लिङ् लकार (आशीर्वाद हेतु, Benedictive Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषयात्यास्ताम्यासुस
मध्यम पुरुषयास्यास्तम्यास्त
उत्तम पुरुषयासम्यास्वयास्म

10. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भविष्य काल, Conditional Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषस्यत्स्यताम्स्यन्
मध्यम पुरुषस्यस्स्यतम्स्यत्
उत्तम पुरुषस्यमस्यावस्याम

आत्मेनपद लकारों की धातु रूप सरंचना

1 . लट् लकार (वर्तमान काल, Present Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषतेआतेअन्ते
मध्यम पुरुषसेआथेध्वे
उत्तम पुरुषवहेमहे

2. लृट् लकार (भविष्यत काल, Future Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषस्यतेस्येतेस्यन्ते
मध्यम पुरुषस्यसेस्येथेस्यध्वे
उत्तम पुरुषस्येस्यावहेस्यामहे

3. लङ् लकार (भूतकाल, Past Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषताम्अन्त
मध्यम पुरुषथास्आथाम्ध्वम्
उत्तम पुरुषवहिमहि

4. लोट् लकार (आज्ञा के अर्थ में, Imperative Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषताम्आताम्अन्ताम्
मध्यम पुरुषस्वआथाम्ध्वम्
उत्तम पुरुषआवहैआमहै

5. विधिलिङ् लकार (चाहिए के अर्थ में, Potential Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषईतईयाताम्ईरन्
मध्यम पुरुषईथास्ईयाथाम्ईध्वम्
उत्तम पुरुषईयईवहिईमहि

6. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल, Perfect Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषआताम्अन्त
मध्यम पुरुषथास्आथम्ध्वम्
उत्तम पुरुषवहिमहि

7. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल, Past Perfect Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषआतेइरे
मध्यम पुरुषसेआथेध्वे
उत्तम पुरुषवहेमहे

8. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्य काल, First Future Tense of Periphrastic)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषतातारौतारस
मध्यम पुरुषतासेतासाथेताध्वे
उत्तम पुरुषताहेतास्वहेतास्महे

9. आशिर्लिङ् लकार (आशीर्वाद हेतु, Benedictive Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषसीष्टसियास्ताम्सीरन्
मध्यम पुरुषसीष्टास्सीयस्थाम्सीध्वम्
उत्तम पुरुषसीयसीवहिसीमहि

10. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भविष्य काल, Conditional Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषस्यतस्येताम्स्यन्त
मध्यम पुरुषस्यथास्स्येथाम्स्यध्वम्
उत्तम पुरुषस्येस्यावहिस्यामहि

धातुओं का वर्गीकरण

संस्कृत की धातुओं को 10 भागों में बांटा गया है। जो निम्न प्रकार हैं –
1. भ्वादिगण
2. अदादिगण
3. जुहोत्यादिगण
4. दिवादिगण
5. स्वादिगण
6. तुदादिगण
7. रुधादिगण
8. तनादिगण
9. क्रयादिगण
10. चुरादिगण

1. भ्वादिगण धातुओं के रूप –

भ्वादिगण की प्रथम धातु ‘भू’ है, इस कारण इस गण का यह नाम पड़ा। 10 गणों में इसका प्रमुख स्थान है। क्रिया में भ्वादिगण बहुत महत्त्व का है। भ्वादिगण की प्रमुख धातुओं के रूप यहाँ दिए गए हैं।

भू-भव् (होना, to be) परस्मैपदी धातु)

पठ् (पढना, to read) परस्मैपदी धातु

अर्च् (पूजा करना, to worship) परस्मैपदी धातु

अस् (होना, to be) परस्मैपदी धातु

गम्-गच्छ (जाना, to go) परस्मैपदी धातु

गुह् (छिपाना, to hide) उभयपदी धातु

घ्रा-जिघ्र (सूँघना, to smell) परस्मैपदी धातु

जि-जय् (जीतना, to win) परस्मैपदी धातु

तप् (तप करना, to penance) परस्मैपदी धातु

दा-यच्छ (देना, to give) परस्मैपदी धातु

दृश्-पश्य (देखना, to see) परस्मैपदी धातु

धाव् (दौडना, to run) उभयपदी धातु

नी (ले जाना, to take) उभयपदी धातु

पा-पिब् (पीना, to drink) परस्मैपदी धातु

पच् (पकाना, to cook) उभयपदी धातु

पत् (गिरना, to fall) परस्मैपदी धातु

भज् (भजन करना, to worship) उभयपदी धातु

यज् (यजन करना, to plan) उभयपदी धातु

लभ् (प्राप्त करना, to obtain) आत्मनेपदी धातु

लिख् (लिखना, to write) परस्मैपदी धातु

वद् (बोलना, to speak) परस्मैपदी धातु

व्रज (जाना, to go) परस्मैपदी धातु

वृत् (होना, to be) आत्मनेपदी धातु

वस् (रहना/निवास करना, to dwell) उभयपदी धातु

शुच् (शोक करना, to grieve) परस्मैपदी धातु

शुभ् (शोभित होना, to admire) परस्मैपदी धातु

स्था-तिष्ठ (बैठना, to sit) परस्मैपदी धातु

सेव् (सेवा करना, to nurse) आत्मनेपदी धातु

श्रु (सुनना, to listen) परस्मैपदी धातु

सद्-सीद् (दुःख पाना, to be sad) परस्मैपदी धातु

3. जुहोत्यादिगण धातुओं के रूप –

जुहोत्यादिगण की प्रथम धातु ‘हु’ है, इस कारण इस गण का यह नाम पड़ा। जुहोत्यादिगण की प्रमुख धातुओं के रूप यहाँ दिए गए हैं।

हु (हवन करना, to sacrifice) परस्मैपदी धातु

दा (देना, to give) उभयपदी धातु

भी (डरना, to be afraid) परस्मैपदी धातु

5. स्वादिगण धातुओं के रूप –

स्वादिगण की प्रथम धातु ‘सु’ है, इस कारण इस गण का यह नाम पड़ा। स्वादिगण की प्रमुख धातुओं के रूप यहाँ दिए गए हैं।

सु ( स्नान करना, to bathe) उभयपदी धातु

चि/चिञ् (चुनना, to select) उभयपदी धातु

शक् (सकना, be able) परस्मैपदी धातु

7. रुधादिगण धातुओं के रूप –

रुधादिगण की प्रथम धातु ‘रुध्’ है, इस कारण इस गण का यह नाम पड़ा। रुधादिगण की प्रमुख धातुओं के रूप यहाँ दिए गए हैं।

रुध् (रोकना, to stop) उभयपदी धातु

भिद् (काटना, to break down) उभयपदी धातु

छिद् (काटना, to cut) उभयपदी धातु

8. तनादिगण धातुओं के रूप –

तनादिगण की प्रथम धातु ‘तन्’ है, इस कारण इस गण का यह नाम पड़ा। तनादिगण की प्रमुख धातुओं के रूप यहाँ दिए गए हैं।

तन् (फैलाना, to spread) उभयपदी धातु

कृ (करना, to do) उभयपदी धातु

9. क्रयादिगण धातुओं के रूप –

क्रयादिगण की प्रथम धातु ‘क्री’ है, इस कारण इस गण का यह नाम पड़ा। क्रयादिगण की प्रमुख धातुओं के रूप यहाँ दिए गए हैं।

क्री (खरीदना, to buy) उभयपदी धातु

ज्ञा (जानना, to know) परस्मैपदी धातु

पू (पवित्र करना, to purify) उभयपदी धातु

10. चुरादिगण धातुओं के रूप –

चुरादिगण की प्रथम धातु ‘चुर्’ है, इस कारण इस गण का यह नाम पड़ा। चुरादिगण की प्रमुख धातुओं के रूप यहाँ दिए गए हैं।

चुर् (चुराना, to steal) उभयपदी धातु

कथ् (कहना, to say) उभयपदी धातु

गण् (गिनना, to count) उभयपदी धातु

चिन्त् (सोचना, to think) उभयपदी धातु

छिद्र (छेद करना, to make a hole) उभयपदी धातु

पाल् (पालना करना, to abide) उभयपदी धातु

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3 thoughts on “Dhatu Roop

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