‘ऊ’ से शुरू होने वाले मुहावरें
‘ऊ’ से शुरू होने वाले मुहावरे (अर्थ एवं वाक्य प्रयोग सहित)
यहाँ ‘ऊ‘ शब्द के कुछ प्रसिद्ध मुहावरे और उनके अर्थ एवं वाक्य में प्रयोग सहित दिए जा रहे है।
1. ऊँच-नीच समझाना –भलाई-बुराई के बारे में बताना
वाक्य प्रयोग : माँ अपने बच्चों को ऊँच-नीच समझाकर ही कहीं बाहर जाने देती है।
2. ऊँट के गले में बिल्ली बाँधना – बेमेल काम करना
वाक्य प्रयोग : कम उम्र की लड़की का बड़ी उम्र के व्यक्ति के साथ विवाह करना ऊँट के गले में बिल्ली बाँधना है।
3. ऊँट के मुँह में जीरा – अधिक आवश्यकता वाले के लिए थोड़ा सामान
वाक्य प्रयोग : हाथी के लिए दो केले तो ऊँट के मुँह में जीरा हैं।
4. ऊल-जलूल बकना – अंट-शंट बोलना
वाक्य प्रयोग : राहुल तो यूँ ही ऊल-जलूल बोलता रहता हैं, उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं देता।
5. ऊसर में बीज बोना या डालना – व्यर्थ कार्य करना
वाक्य प्रयोग : मेरे मित्र ने मुझसे कहा कि यहाँ पर घर बनाना तो ऊसर में बीज डालना है।
6. ऊँचा सुनना – कुछ बहरा होना
वाक्य प्रयोग : मेरे पिताजी थोड़ा ऊँचा सुनते हैं, इसलिए थोड़ा जोर से बोलिए।
7. ऊँच-नीच समझना – भलाई-बुराई की समझ होना
वाक्य प्रयोग : हमें दूसरों को राय देने से पहले खुद ही ऊँच-नीच समझ लेनी चाहिए।
8. ऊपर की आमदनी – नियमित स्रोत से न होने वाली आय
वाक्य प्रयोग : सरकारी नौकरी में तनख्वाह भले ही कम हो पर ऊपर की आमदनी का तो कोई हिसाब ही नहीं है।
9. ऊपरी मन से कहना/करना – दिखावे के लिए कहना/करना
वाक्य प्रयोग : रोहन हमेशा ही ऊपरी मन से काम के लिए पूछता था और मैं हमेशा मना कर देता था।
अन्य अक्षरों से मुहावरें
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